सुपोषण अभियान का दिखा प्रभाव, कुपोषित बच्चों की संख्या 19752 से घटकर हुई 11165

कोण्डागांव, 05 जून 2021

कोण्डागांव जिला एक जनजातिय बहुल पर्वतीय क्षेत्र है। इसमें 06 लाख से अधिक जनसंख्या निवासरत् है। इस क्षेत्र में प्रारंभ से ही पहुंचविहीन होने, अतिवादी शक्तियों के प्रभाव एवं सांस्कृतिक-धार्मिक कारणों से विकास की मुख्य धारा से कई गांव अलग रहे हैं। ऐसे में इन गांवों में अशिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं एवं कुपोषण मुख्य समस्या बना रहा। जिसे देखते हुए 02 अक्टूबर 2019 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सुपोषण अभियान पूरे प्रदेश में चालू किया गया। जिसके बाद से जिले में लगातार बच्चों को सुपोषित करने के लिए प्रयास किये जाते रहे हैं। फरवरी 2019 में किये गये वजन त्यौहार के अनुसार कोण्डागांव में 0-5 वर्ष के बच्चों में 37 प्रतिशत बच्चे कुपोषित पाये गये थे। इसके अनुसार 57000 बच्चों में से 19572 बच्चों के कुपोषित होने की बात सामने आयी। जिसे देखते हुए कोण्डागांव कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने बच्चों को सुपोषित करने के लिए सुपोषण अभियान के अंतर्गत ‘नंगत पिला‘ कार्यक्रम जून 2020 में प्रारंभ किया था।

जिसके परिणामस्वरूप फरवरी 2019 में जहां 19572 बच्चे कुपोषित थे, अप्रैल 2021 तक केवल 11165 बच्चे ही कुपोषित बचे। इस प्रकार कुपोषित बच्चों की संख्या में 42.95 प्रतिशत की कमी देखी गयी।

‘नंगत पिला‘ कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वप्रथम बच्चों में फरवरी 2019 में हुए सर्वे के बाद जून 2020 तक कुपोषित बच्चों की संख्या में आये परिवर्तन को देखते हुए, कुपोषण की सहीं स्थिति की जानकारी प्राप्त करनी आवश्यक थी एवं कोरोना महामारी के कारण 2020 में वजन त्यौहार आयोजित नहीं किया जा सका था। जिसे देखते हुए 1.5 वर्ष में आये परिवर्तन के बाद वर्तमान स्थिति को जानने के लिए जिले के सभी 1829 आंगनबाड़ी केन्द्रों के अंतर्गत आने वाले सभी 0-5 वर्ष तक के 57000 बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराई गई। जिसमें 12726 बच्चों में कुपोषण होने की बात सामने आयी।

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‘नंगत पिला‘ कार्यक्रम के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संयुक्त अभियान चलाकर बच्चों में कुपोषण के होने के प्रमुख कारणों का पता लगाने के लिए प्रश्नावली एवं रूट काॅज एनालाइसिस का सहारा लेते हुए उप स्वास्थ्य केन्द्रों के डाॅक्टरों द्वारा जगह-जगह स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 11394 कुपोषित बच्चों को लाकर उनकी जांच की गई एवं बच्चों के माता-पिता तथा परिजनों से प्रश्नावली के माध्यम से कुपोषण के सम्भावित कारणों के संबंध में पूछा गया।

इस सर्वे में कुपोषण के सम्भावित मुख्य कारणों के रूप में पांच कारणों को कुपोषण के लिए उत्तरदायी माना गया। इनमें निश्चित अंतराल में बच्चों द्वारा भोजन न किया जाना, जन्म के समय वजन कम होना, दो प्रसव के मध्य कम अंतराल होना, मौसमी बीमारियां जैसे डायरिया, मलेरिया आदि, जागरूकता की कमी के कारण परिजनों द्वारा बच्चों का सहीं ध्यान न रखा जाना। रूट काॅज एनालाइसिस के आधार पर कुपोषित बच्चों के परिवार विशेष को केन्द्र पर रखते हुए उनके लिए अलग-अलग रणनीतियां तैयार की गई। इस प्रकार सभी 12726 बच्चों के परिवारों के लिए कुल 251 रणनीतियां अप्रैल 2021 तक बन कर तैयार हो गई थी।

इसके आधार पर प्रतिमाह बच्चों के विकास के संबंध में जानकारियां इकट्ठी कर उनका डाटाबेस तैयार किया जाने लगा। जिसकी समीक्षा प्रतिमाह स्वयं कलेक्टर किया करते थे एवं इस समीक्षा बैठक में आने वाले माह के लिए एक्शन प्लान भी तैयार किया जाता था। इस कार्यक्रम में गांव के उत्साही युवाओं को जोड़ने के लिए उन्हें सुपोषण मित्र बनाया गया। इसके तहत् कुल 1438 सुपोषण मित्र बनाये गये साथ ही कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई। इस प्रकार कुल 388 नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये, ये सभी नोडल अधिकारी ग्रामों में जाकर कार्यक्रम के सफल संचालन को सुनिश्चित करते थे एवं इसके लिए बेहतर कार्ययोजना तैयार करने में सहायता भी करते थे।

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सुपोषण अभियान के तहत् कोरोना महामारी के दौर में भी जब लाॅकडाउन के कारण आंगनबाड़ी केन्द्र बंद हो चुके थे तब बच्चों को सुपोषित रखने के लिए डोर-टू-डोर जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सूखा राशन पहुंचाया गया। सूखे राशन की गुणवत्ता के संबंध में शिकायत प्राप्त होेने पर प्रशासन द्वारा सूखे राशन के वितरण के पूर्व उसकी जांच हेतु जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के नेतृत्व में जांच दल गठित कर जांच उपरांत ही वितरण की अनुमति प्रदान की साथ ही उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उड़ान आजीविका केन्द्र द्वारा गुणवत्तायुक्त सूखा राशन उपलब्ध कराया गया। इस कार्य में 200 महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हुआ।

इसके अलावा कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पोषण प्रदान करने के लिए जिले में ही महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा कुकाड़गारकापाल में अण्डा उत्पादन केन्द्र के तीन शेडों की स्थापना की गई। इन अण्डों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लाॅकडाउन में भी घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों को खिलाया गया। इस केन्द्र से अब तक 61 हजार से अधिक अण्डों का वितरण आंगनबाड़ी केन्द्रों को किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त कोदो-कुटकी की खिचड़ी भी वितरित की जा रही है, जो कि सामान्य चावल से अधिक लाभदायक होती है एवं महुआ लड्डू, रागी, नारियल के पोषणयुक्त बिस्किट उड़ान एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा है, जिसे बच्चों को वितरित किया जायेगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के द्वारा फरवरी 2019 से अप्रैल 2021 तक बच्चों में कुपोषण के आंकड़ों की तुलना करने पर पाया गया कि ‘नंगत पिला‘ कार्यक्रम प्रारंभ होने के बाद कुपोषण में 17.26 प्रतिशत की कमी देखी गई है। जहां 2019 में 19572 बच्चे कुपोषित थे, अप्रैल 2021 तक केवल 11165 बच्चे ही कुपोषित बचे। इस प्रकार कुपोषित बच्चों की संख्या में 42.95 प्रतिशत की कमी देखी गयी। ‘नंगत पिला‘ कार्यक्रम शुरू होने से व्यवस्थित तरीके से कुपोषित बच्चों की पहचान कर हर बच्चे पर ध्यान केंद्रीत करते हुए उसमें कुपोषण के कारणों के आधार पर कार्ययोजना तैयार कर बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए कार्य किया गया।

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कोरोना महामारी के दौर में भी यह कार्यक्रम अनवरत चलता रहा। ‘नंगत पिला‘ कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में एक मात्र ऐसी योजना है, जिसमें प्रत्येक बच्चे में कुपोषण के कारणों का पता लगाकर उस बच्चे पर केंद्रीत योजनाएं बनाकर उन्हें सुपोषित करने का प्रयास करते हुए मासिक तौर पर बच्चों की प्रगति के संबंध में आॅनलाईन जानकारियां एकत्र की गई।

क्रमांक-260/गोपाल

Source: http://dprcg.gov.in/

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