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छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग ने जारी की 518 प्राध्यापकों की अंतिम संशोधित वरिष्ठता सूची
छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग ने जारी की 518 प्राध्यापकों की अंतिम संशोधित वरिष्ठता सूची

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत और पदोन्नत 518 प्राध्यापकों (Professors) की अंतिम संशोधित वरिष्ठता सूची आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। यह आदेश उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णय और शासन के पदोन्नति नियमों के परिपालन में जारी किया गया है।

वरिष्ठता निर्धारण के प्रमुख आधार उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्राध्यापकों की वरिष्ठता का आकलन मुख्य रूप से दो समय अवधियों— 01 अप्रैल 2017 और 01 अप्रैल 2023 की स्थिति के आधार पर किया गया है। सूची तैयार करने में निम्नलिखित मापदंडों को प्राथमिकता दी गई है:

  • लोक सेवा आयोग (PSC) द्वारा चयन की मेरिट।
  • विषयवार नियुक्ति और कार्यभार ग्रहण करने की वास्तविक तिथि।
  • संविलियन एवं नियमितीकरण की आधिकारिक तिथि।
  • समान आदेश तिथि होने पर ‘कार्यभार ग्रहण’ करने के समय को आधार माना गया है।
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प्राचार्यों को दिए गए कड़े निर्देश उच्च शिक्षा विभाग ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, और बस्तर सहित प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे इस सूची का विधिवत प्रकाशन करें। यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि संबंधित प्राध्यापकों को उनकी वरिष्ठता क्रम की जानकारी समय पर मिल जाए। उल्लेखनीय है कि इस सूची में शामिल कई प्राध्यापक वर्तमान में प्राचार्य के पद पर पदोन्नत हो चुके हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।

आपत्ति दर्ज करने के लिए 20 जनवरी तक का समय विभाग ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्राध्यापकों को आपत्ति दर्ज करने का अवसर भी दिया है।

  • अंतिम तिथि: यदि किसी प्राध्यापक को अपनी वरिष्ठता की स्थिति पर कोई विसंगति नजर आती है, तो वे 20 जनवरी 2026 तक निर्धारित प्रारूप में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
  • नोट: निर्धारित समय-सीमा के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन या दावे पर विभाग द्वारा विचार नहीं किया जाएगा।
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निष्कर्ष उच्च शिक्षा विभाग का यह कदम लंबे समय से चल रहे वरिष्ठता विवादों को सुलझाने में सहायक होगा। इससे न केवल विभाग की प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में होने वाली पदोन्नति प्रक्रियाओं में भी स्पष्टता आएगी।

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