बिलासपुर संभाग के खेल मैदानों में पिछले पांच दिनों से चल रहा उत्साह का महाकुंभ आज संपन्न हो गया। 4 से 8 फरवरी तक आयोजित 69वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में मेजबान छत्तीसगढ़ ने अपना लोहा मनवाते हुए बालक और बालिका दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास रच दिया। समापन समारोह छत्तीसगढ़ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के मैदान में हुआ, जहां बिलासपुर के खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रदेश भर से आए खेल प्रेमियों का जोश देखने लायक था।
जमीनी हकीकत: पदक की चमक के पीछे का संघर्ष
आंकड़ों में देखें तो छत्तीसगढ़ ने दोहरा स्वर्ण जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है, लेकिन खेल के मैदान से बाहर की तस्वीर कुछ अलग कहानी बयां करती है।
- स्थानीय खिलाड़ियों की आवाज: बिलासपुर के मंगला क्षेत्र के एक युवा खिलाड़ी, आदित्य जगत (नाम परिवर्तित), जो इस प्रतियोगिता को करीब से देख रहे थे, कहते हैं— “मेडल जीतना गर्व की बात है, लेकिन हमारे ब्लॉक स्तर के मैदानों की हालत खराब है। नेशनल लेवल के लिए जो कोच और डाइट यहाँ मिलती है, वह साल भर ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं होती।”
- प्रशासनिक स्वीकारोक्ति: समापन पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिला शिक्षा अधिकारी को जो फीडबैक लेने का निर्देश दिया है, वह इस ओर इशारा करता है कि आवास और भोजन की व्यवस्थाओं में कुछ खामियां रही हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रतियोगिता के दूसरे दिन कुछ बाहरी राज्यों के कोचों ने खिलाड़ियों के रुकने के स्थान पर सफाई की कमी की शिकायत की थी।
जिला-वार प्रभाव और भविष्य की राह
इस जीत का सबसे बड़ा असर छत्तीसगढ़ के उभरते हुए खेल केंद्रों पर पड़ेगा। बिलासपुर को ‘खेल राजधानी’ के रूप में प्रमोट किया जा रहा है, लेकिन इसके लाभ का विकेंद्रीकरण जरूरी है।
- बस्तर और सरगुजा का प्रतिनिधित्व: इस स्वर्ण पदक विजेता टीम में बस्तर के नारायणपुर और सरगुजा के दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र भी शामिल हैं। यह जीत दिखाती है कि अगर सही मौका मिले, तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की प्रतिभा भी राष्ट्रीय मंच पर चमक सकती है।
- बुनियादी ढांचा: रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरी केंद्रों में तो सिंथेटिक ट्रैक और आधुनिक सुविधाएं हैं, लेकिन राजनांदगांव (हॉकी का गढ़) और कोरबा जैसे औद्योगिक बेल्ट में आज भी खिलाड़ियों को धूल भरे मैदानों में अभ्यास करना पड़ता है।

ऐतिहासिक संदर्भ: वादों और हकीकत का अंतर
यह बिलासपुर में आयोजित होने वाला कोई पहला बड़ा खेल आयोजन नहीं है। 2020 में भी इसी तरह के भव्य वादे किए गए थे कि छत्तीसगढ़ को देश का ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाया जाएगा। हालांकि, पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य के बजट में खेल बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित राशि का लगभग 40% हिस्सा केवल बड़े शहरों के स्टेडियमों के रखरखाव में खर्च हो जाता है, जबकि ग्रामीण खेल अकादमियां फंड की कमी से जूझ रही हैं।
धरमलाल कौशिक और सुशांत शुक्ला जैसे जनप्रतिनिधियों ने ‘विकसित भारत 2047’ की बात तो की, लेकिन स्थानीय खिलाड़ियों की मांग है कि ‘खेल छात्रवृत्ति’ (Sports Scholarship) की राशि में कम से कम 20% की बढ़ोतरी की जाए ताकि उन्हें डाइट के लिए परिवार पर निर्भर न रहना पड़े।
खिलाड़ियों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी: प्रतियोगिता समाप्त हो चुकी है, लेकिन पदक विजेता और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी आगामी राज्य स्तरीय छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो सकते हैं।
- अगला कदम: खिलाड़ी अपने प्रदर्शन का प्रमाण पत्र (Certificate) अपने स्कूल के पीटीआई (PTI) के माध्यम से जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) में जमा करें।
- शिकायत/सुझाव: यदि आवास या पुरस्कार राशि के वितरण में कोई समस्या है, तो बिलासपुर कलेक्ट्रेट के जनदर्शन में सोमवार को आवेदन दे सकते हैं।
- संपर्क: खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ – 0771-2234547 (कार्यालयीन समय)











