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महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून को मंजूरी: छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों पर क्या होगा असर?
महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून को मंजूरी: छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों पर क्या होगा असर?

महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून (Prohibition of Conversion Bill, 2026) के मसौदे को मंजूरी दे दी है। यह कानून न केवल महाराष्ट्र बल्कि छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों—राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और बीजापुर—के सामाजिक समीकरणों पर गहरा असर डालेगा। नए प्रावधानों के अनुसार, अब धर्मांतरण से 60 दिन पहले जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होगा और जबरन धर्मांतरण पर 7 साल की जेल व 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

जमीनी हकीकत: सीमावर्ती गांवों में बढ़ेगी चौकसी

छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा संभाग में धर्मांतरण का मुद्दा लंबे समय से गर्म रहा है। महाराष्ट्र के इस सख्त कानून का सीधा असर छत्तीसगढ़ के उन गांवों पर पड़ेगा जो महाराष्ट्र की सीमा से सटे हैं।

36khabar.com की टीम ने जब राजनांदगांव के सीमावर्ती ब्लॉक मानपुर के स्थानीय निवासी इतवारी राम सलाम से बात की, तो उन्होंने बताया— “अक्सर सरहद पार (महाराष्ट्र) से कुछ लोग आकर यहां सभाएं करते हैं। अगर वहां कानून सख्त हुआ, तो ऐसे लोग अब सीधे पकड़े जाएंगे।” सरकारी आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल (2025) में धर्मांतरण से जुड़े विवादों में 15% की बढ़ोतरी हुई है। महाराष्ट्र के इस कदम के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस भी सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘इंटेलिजेंस इनपुट’ साझा करने की तैयारी में है।

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जिला-वार प्रभाव और कानूनी पेच

महाराष्ट्र का यह कानून पड़ोसी राज्यों के लिए एक ‘प्रेशर टेस्ट’ की तरह काम करेगा। इसका प्रभाव इन क्षेत्रों में सबसे अधिक दिखेगा:

  • बस्तर संभाग (कांकेर और बीजापुर): हाल ही में कांकेर के कुछ गांवों में बाहरी पादरियों के प्रवेश पर ग्राम सभाओं द्वारा प्रतिबंध लगाने के बोर्ड लगाए गए थे, जिसे हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया है। महाराष्ट्र में कानून आने के बाद इन क्षेत्रों में ‘घर वापसी’ जैसे अभियानों को बल मिल सकता है।
  • राजनांदगांव और मोहला-मानपुर: यहाँ के वनांचलों में सक्रिय मिशनरी संस्थाओं पर अब महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़, दोनों तरफ की पुलिस की दोहरी नजर रहेगी।
  • औद्योगिक क्षेत्र (भिलाई-रायपुर): शहरी क्षेत्रों में ‘प्रलोभन’ देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए दक्षिणपंथी संगठन अब छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह के ‘कठोर’ मॉडल की मांग तेज कर रहे हैं।

पिछले वर्षों का संदर्भ और पैटर्न

छत्तीसगढ़ में पहले से ही ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968’ लागू है। हालांकि, वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार ने संकेत दिए हैं कि वे भी जल्द ही एक नया और अधिक सख्त विधेयक पेश कर सकते हैं।

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इतिहास गवाह है कि जब भी किसी पड़ोसी राज्य (जैसे मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश) ने सख्त कानून बनाया है, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विरोधी आंदोलन तेज हुए हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में बस्तर की सीटों पर भाजपा की जीत के पीछे एक बड़ा कारण धर्मांतरण के खिलाफ मुखर होना भी माना जाता है।

किसानों के लिए राहत: कर्ज माफी की सुगबुगाहट

इसी कैबिनेट बैठक में महाराष्ट्र सरकार ने कर्जदार किसानों के लिए बड़ी कर्ज माफी के संकेत दिए हैं। छत्तीसगढ़ के किसान जो महाराष्ट्र की मंडियों (जैसे गोंदिया या नागपुर) में अपनी फसल बेचते हैं, उनके लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में ‘धान का कटोरा’ होने के नाते यहाँ के किसान पहले से ही ₹3100 प्रति क्विंटल की दर का लाभ ले रहे हैं, लेकिन महाराष्ट्र की कर्ज माफी सीमावर्ती क्षेत्रों के सहकारी बैंकों पर दबाव बढ़ा सकती है।

महत्वपूर्ण जानकारी: यदि आपको जबरन धर्मांतरण या प्रलोभन की शिकायत करनी है, तो अपने नजदीकी पुलिस थाने या ‘धर्मांतरण निवारण सेल’ में संपर्क करें। हेल्पलाइन नंबर: 112 (आपातकालीन सेवा)

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