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सुकमा मुठभेड़: गट्टापाड़ के जंगलों में एक नक्सली ढेर, 31 मार्च की डेडलाइन से पहले फोर्स का बड़ा एक्शन
सुकमा मुठभेड़: गट्टापाड़ के जंगलों में एक नक्सली ढेर, 31 मार्च की डेडलाइन से पहले फोर्स का बड़ा एक्शन

सुकमा के गट्टापाड़ में बड़ी मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने एक नक्सली को मार गिराया

सुकमा छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के गट्टापाड़ क्षेत्र में शनिवार सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई जबरदस्त मुठभेड़ में एक नक्सली मारा गया है। केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन में अब महज 48 घंटे शेष हैं, और ऐसे में बस्तर के जंगलों में फोर्स की सक्रियता अपने चरम पर है। यह ऑपरेशन डीआरजी (DRG) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा चलाया गया, जिसका नेतृत्व स्वयं सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं।

जमीनी हकीकत: दावों और हकीकत के बीच बस्तर का ग्रामीण

सरकार का लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सलवाद को कागजों पर सीमित करना है, लेकिन सुकमा के अंदरूनी इलाकों जैसे गट्टापाड़, जगरगुंडा और चिंतागुफा में स्थिति आज भी चुनौतीपूर्ण है। जमीनी स्तर पर काम कर रहे हमारे सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जहां एक ओर फोर्स का दबाव बढ़ा है, वहीं नक्सलियों ने अपनी रणनीति बदलते हुए छोटे समूहों (Small Action Teams) में वार करना शुरू कर दिया है।

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गट्टापाड़ के एक ग्रामीण पोड़ियामी हुंगा (नाम परिवर्तित) ने बताया, “पिछले एक हफ्ते से ड्रोन की आवाजें और जवानों की गश्त बढ़ गई है। हम डर में हैं कि कहीं क्रॉसफायर में ग्रामीण न फंस जाएं।” आधिकारिक तौर पर एक नक्सली के मारे जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार घने जंगलों का फायदा उठाकर कुछ अन्य नक्सली घायल अवस्था में भागने में सफल रहे हैं।

जिला-वार प्रभाव: सुकमा-बीजापुर सरहद पर हाई अलर्ट

इस मुठभेड़ का असर केवल गट्टापाड़ तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव सुकमा और बीजापुर के सरहदी इलाकों पर पड़ रहा है:

  • नक्सल प्रभावित जोन: सुकमा के कोण्टा और बीजापुर के बासागुड़ा ब्लॉक को जोड़ने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
  • आदिवासी समुदाय: सुरक्षा बलों के बढ़ते कैंपों (Forward Operating Bases) के कारण नक्सलियों की रसद सप्लाई कट गई है, जिससे वे अब स्थानीय हाट-बाजारों में ग्रामीणों पर दबाव बना रहे हैं।
  • विकास कार्य: इस मुठभेड़ के बाद क्षेत्र में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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ऐतिहासिक संदर्भ: डेडलाइन और अधूरी चुनौतियां

बस्तर में ‘डेडलाइन’ की राजनीति नई नहीं है। इससे पहले भी कई बार “नक्सलवाद के खात्मे” की तारीखें तय की गई थीं। 2024-25 के दौरान सुकमा में रिकॉर्ड संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, लेकिन गट्टापाड़ जैसी मुठभेड़ें बताती हैं कि कोर कैडर अभी भी सक्रिय है। 2022 में इसी क्षेत्र में हुए बड़े हमले के बाद से फोर्स ने अपनी रणनीति बदली है, जिसके तहत अब ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय’ के बजाय ‘होल्ड एंड बिल्ड’ (इलाके पर कब्जा और फिर विकास) पर ध्यान दिया जा रहा है।

2025 के आंकड़ों के अनुसार, सुकमा जिले के लगभग 40% अंदरूनी गांवों में अभी भी पहुंच मार्ग का अभाव है, जिसका फायदा नक्सली उठाते रहे हैं। आज की कार्रवाई उसी “वैक्यूम एरिया” को भरने की एक कड़ी है।

प्रभावित क्षेत्रों के लिए निर्देश और सावधानी:

  • गट्टापाड़, भेज्जी और जगरगुंडा के ग्रामीण अगले 48 घंटों तक घने जंगलों की ओर जाने से बचें, क्योंकि सर्च ऑपरेशन जारी है।
  • किसी भी संदिग्ध गतिविधि या लावारिस वस्तु दिखने पर तुरंत नजदीकी सुरक्षा कैंप या ‘112’ पर सूचना दें।
  • यात्री बसें जो सुकमा से बीजापुर की ओर जाती हैं, वे मुख्य मार्ग का ही प्रयोग करें।
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