बलौदाबाजार जिले के ऐतिहासिक तहसील कार्यालय परिसर में शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पुराने डीएसपी कार्यालय से शुरू होकर यह तहसीलदार कक्ष तक फैल गईं। आनन-फानन में नगर पालिका और स्थानीय सीमेंट संयंत्रों (अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट) की दमकल गाड़ियों को बुलाना पड़ा। हालांकि प्रशासन का दावा है कि सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित निकाल लिए गए हैं, लेकिन पुराने भवन का एक बड़ा हिस्सा खाक हो गया है।
जमीनी हकीकत: दावों और धुएं के बीच का सच
प्रशासनिक अधिकारी, एसडीएम प्रकाश कोरी ने स्पष्ट किया है कि “रिकॉर्ड रूम पूरी तरह सुरक्षित है”, लेकिन ग्राउंड जीरो पर स्थिति थोड़ी जटिल दिख रही है। हमारे 15 साल के अनुभव में हमने देखा है कि पुराने भवनों में वायरिंग की समस्या हमेशा से रही है।
36khabar.com की टीम ने जब मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों से बात की, तो खम्मनपारा के ग्रामीण रामलाल साहू ने बताया, “हमें डर है कि कहीं हमारे पट्टे और सीमांकन के पुराने आवेदन इस आग की भेंट न चढ़ गए हों। डिजिटल रिकॉर्ड तो है, लेकिन मैन्युअल फाइलें जलने से प्रक्रिया महीनों लटक जाती है।” अक्सर ऐसे हादसों में ‘मिसल रिकॉर्ड’ (1929-30 के पुराने दस्तावेज) के रख-रखाव पर सवाल उठते हैं, जो छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए जमीन की मलकियत का सबसे बड़ा सबूत होते हैं।

जिला-वार और ब्लॉक प्रभाव: बलौदाबाजार-भाटापारा
यह आग केवल एक इमारत का जलना नहीं है, बल्कि इससे जुड़े 3 प्रमुख ब्लॉक के हजारों लंबित मामलों पर असर पड़ सकता है:
- राजस्व मामले: बलौदाबाजार ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले लगभग 120 गांवों के नामांतरण और बंटवारे के केस वर्तमान में इसी कार्यालय से संचालित होते हैं।
- औद्योगिक क्षेत्र का दबाव: सिमगा और बलौदाबाजार के बीच स्थित औद्योगिक बेल्ट के कारण यहाँ भू-अर्जन (Land Acquisition) के दस्तावेज अत्यंत संवेदनशील हैं।
- पुराना रिकॉर्ड: चूंकि यह जिला मुख्यालय है, यहाँ कसडोल और पलारी ब्लॉक के भी कुछ पुराने रिकॉर्ड्स आर्काइव के रूप में रखे जाते हैं। यदि रिकॉर्ड रूम के गलियारे तक भी आंच पहुँची है, तो दीमक और नमी से पहले से ही जर्जर फाइलें राख हो सकती हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और लापरवाही का पैटर्न
बलौदाबाजार का यह तहसील भवन ब्रिटिश कालीन वास्तुकला का नमूना है। आपको याद होगा, साल 2022 में भी इसी जिले के एक अन्य सरकारी दफ्तर में शॉर्ट सर्किट से आग की घटना हुई थी। छत्तीसगढ़ के पुराने सरकारी भवनों में ‘फायर ऑडिट’ (Fire Audit) की कमी हमेशा एक गंभीर मुद्दा रही है।
जमीनी हकीकत यह है कि इन पुराने भवनों में लकड़ी के बीम और छतों का इस्तेमाल हुआ है, जो आग पकड़ने में ईंधन का काम करते हैं। पिछले तीन सालों में यह तीसरी बड़ी घोषणा थी कि तहसील कार्यालय को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस किया जाएगा, लेकिन आज की घटना बताती है कि फिजिकल फाइलों पर हमारी निर्भरता और उनकी सुरक्षा अब भी राम भरोसे है।
प्रभावित ग्रामीण और किसान क्या करें?
यदि आपके जमीन संबंधी मामले (सीमांकन, बटांकन या नामांतरण) बलौदाबाजार तहसील में लंबित हैं, तो निम्नलिखित कदम उठाएं:
- डिजिटल कॉपी चेक करें: सबसे पहले ‘भुइयां’ (Bhuiyan) पोर्टल पर जाकर अपने खसरा-खतौनी की स्थिति जांचें।
- तहसील का दौरा: अगले 48 घंटों तक कार्यालय में अव्यवस्था रह सकती है। सोमवार के बाद संबंधित पटवारी या आरआई (RI) से मिलकर अपनी फाइल की भौतिक स्थिति की पुष्टि करें।
- आवेदन की पावती: यदि आपने हाल ही में कोई मूल दस्तावेज जमा किया था, तो उसकी पावती (Receipt) संभाल कर रखें।
- हेल्पलाइन: किसी भी भ्रम की स्थिति में जिला कलेक्टर कार्यालय के कंट्रोल रूम नंबर पर संपर्क करें।











