बस्तर की लाइफलाइन पर ‘ब्रेक’: दावों और हकीकत का टकराव
जगदलपुर से दुर्ग के बीच चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि बस्तर के मध्यमवर्गीय परिवारों और छात्रों के लिए राजधानी तक पहुँचने का सबसे सस्ता और सुरक्षित जरिया थी। जमीनी हकीकत यह है कि रेलवे ने इसे ‘अस्थायी’ रूप से बंद किया था, लेकिन अब आधा दशक बीत जाने के बाद भी इसे बहाल नहीं किया गया है।
अधिकारी अक्सर तकनीकी कारणों या रैक की कमी का हवाला देते हैं, लेकिन दंतेवाड़ा के स्थानीय निवासी सोनू कश्यप कहते हैं, “नेताओं ने कई बार नारियल फोड़े और आश्वासन दिए, पर हमें आज भी जगदलपुर से रायपुर जाने के लिए 700 से 900 रुपये बस का किराया देना पड़ रहा है। ट्रेन में यही सफर महज 150-200 रुपये में पूरा हो जाता था।
जिला-वार प्रभाव: सुकमा से कांकेर तक की दुश्वारियां
इस ट्रेन के बंद होने का असर सिर्फ जगदलपुर तक सीमित नहीं है:
- बस्तर और दंतेवाड़ा: यहाँ के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा या निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। ट्रेन न होने से एम्बुलेंस या प्राइवेट टैक्सी का खर्च 8,000 रुपये के पार चला जाता है।
- शिक्षा पर मार: भिलाई और दुर्ग में पढ़ाई कर रहे बस्तर के सैकड़ों छात्र हर हफ्ते घर आने-जाने के लिए बसों पर निर्भर हैं, जिससे उनके मासिक बजट पर 3000-4000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
- व्यापारिक नुकसान: जगदलपुर के छोटे व्यापारी जो रायपुर के थोक बाजार से सामान लाते थे, अब माल ढुलाई के महंगे खर्च के कारण स्थानीय बाजार में कीमतें बढ़ाने को मजबूर हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: 70 साल का दोहन और 5 ट्रेनों का ‘उपहार’
आंकड़ों पर गौर करें तो बस्तर के बैलाडीला से लौह अयस्क (Iron Ore) की ढुलाई पिछले सात दशकों से हो रही है। रेलवे को यहाँ से सालाना हजारों करोड़ का राजस्व मिलता है। ऐतिहासिक विडंबना देखिए कि जिस संभाग ने देश के स्टील उद्योग को सींचा, उसे बदले में यात्री सुविधाओं के नाम पर केवल 5 ट्रेनें मिलीं।
इससे पहले 2022 में भी रेल रोको आंदोलन की चेतावनी दी गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने ‘जल्द बहाली’ का वादा किया था। ठीक वैसा ही वादा अब फिर से मार्च तक हवाई सेवा और ट्रेन शुरू करने के नाम पर किया जा रहा है।
प्रमुख तथ्य और वर्तमान स्थिति
- बस किराया: ₹700 – ₹900 (जगदलपुर से रायपुर/दुर्ग)
- ट्रेन किराया (अनुमानित): ₹160 – ₹210
- राजस्व: बस्तर रेल मार्ग भारतीय रेलवे के सबसे कमाऊ सेक्शनों में से एक है।
- वैकल्पिक सेवा: हवाई सेवा भी फिलहाल ठप है, जिससे कनेक्टिविटी पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर है।
क्या करें बस्तर के यात्री?
यदि आप इस समस्या से प्रभावित हैं, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से रेल मंत्रालय को ज्ञापन सौंपना जारी रखें। यात्री अपनी शिकायतें रेल मदद (RailMadad) पोर्टल और ट्विटर (X) पर रेल मंत्री को टैग करके दर्ज करा सकते हैं ताकि दबाव बना रहे।











