तखतपुर के लखसार से ‘सुरभि गौधाम’ का आगाज: कागजी योजना या चारे का स्थायी समाधान?
बिलासपुर/तखतपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड के ग्राम लखसार में प्रदेश की महत्वाकांक्षी ‘गौधाम योजना’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब प्रदेश के सभी गौठानों और केंद्रों को ‘सुरभि गौधाम’ के नाम से जाना जाएगा। लखसार में लगभग 25 एकड़ भूमि पर विकसित इस गौधाम में 19 एकड़ में चारागाह बनाया गया है, जिसका प्रबंधन ‘कामधेनु गौशाला समिति’ को सौंपा गया है।
सरकार का दावा है कि इस योजना से सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं को छत मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मुख्यमंत्री ने लखसार के लिए महतारी सदन, मिनी स्टेडियम और 500 मीटर गौरव पथ के साथ-साथ गौधाम में प्रशिक्षण भवन के लिए 25 लाख रुपये की तत्काल स्वीकृति दी है।
जमीनी हकीकत: पुराने अनुभवों से डरे हैं ग्रामीण
तखतपुर और आसपास के बिल्हा बेल्ट में पिछले दो वर्षों में ‘गौठान’ राजनीति का केंद्र रहे हैं।
ग्रामीण किसान संतोष कौशिक, ग्राम लखसार कहते हैं- “पिछली सरकार के समय भी गौठानों में चारा और पानी के नाम पर काफी पैसा आया, लेकिन गर्मी आते ही पशु सड़कों पर आ जाते थे। अभी लखसार में 19 एकड़ में हरा चारा लगाने की बात हो रही है, लेकिन चुनौती इसे साल भर बनाए रखने की है, खासकर जब भूजल स्तर नीचे चला जाता है।”
फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान यह बात सामने आई है कि केवल शेड बना देने से समस्या हल नहीं होगी। बिलासपुर-मुंगेली रोड पर आवारा मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाएं आज भी एक बड़ी चुनौती हैं। प्रशासन ने एक ‘काउ कैचर’ और एक ‘पशु एम्बुलेंस’ देने की घोषणा तो की है, लेकिन तखतपुर जैसे बड़े ब्लॉक के लिए यह ऊंट के मुँह में जीरे के समान है।
जिला-वार प्रभाव और विश्लेषण
यह योजना मुख्य रूप से तीन स्तरों पर राज्य को प्रभावित करेगी:
- बिलासपुर संभाग (औद्योगिक और कृषि मिश्रित): यहाँ सड़क दुर्घटनाएं कम करने पर जोर है।
- बस्तर और सरगुजा (आदिवासी क्षेत्र): यहाँ ‘सुरभि गौधाम’ को वन अधिकार पट्टों (FRA 2006) के तहत मिलने वाली घास भूमि से जोड़ने की योजना है।
- मैदानी इलाके (दुर्ग, रायपुर, बेमेतरा): यहाँ गोबर से उत्पाद बनाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए इसे ट्रेनिंग हब बनाया जाएगा।
पिछले वर्षों का संदर्भ: क्या बदलेगा?
छत्तीसगढ़ में 2020 से 2023 के बीच ‘नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी’ योजना के तहत हजारों गौठान बनाए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, उनमें से लगभग 40% गौठान केवल कागजों पर या चारे की कमी के कारण निष्क्रिय हो गए थे। वर्तमान सरकार ‘सुरभि गौधाम’ के जरिए निजी समितियों (जैसे लखसार में कामधेनु समिति) को शामिल कर उत्तरदायित्व (Accountability) तय करने की कोशिश कर रही है।
पशुपालकों और ग्रामीणों के लिए निर्देश
यदि आप अपने क्षेत्र के आवारा पशुओं को ‘सुरभि गौधाम’ भेजना चाहते हैं या योजना से जुड़ना चाहते हैं, तो यह करें:
- समिति से संपर्क: अपने नजदीकी पंचायत भवन में जाकर पता करें कि आपके क्षेत्र का गौधाम किस पंजीकृत समिति द्वारा संचालित है।
- प्रशिक्षण: लखसार केंद्र में जल्द ही पशुपालन और हरा चारा उत्पादन का प्रशिक्षण शुरू होगा। इच्छुक युवा जनपद कार्यालय तखतपुर में आवेदन दे सकते हैं।
- शिकायत/सुझाव: पशु क्रूरता या चारे की कमी होने पर जिला पशु चिकित्सा विभाग के टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करें।











