भखारा से राजकिशोर नगर तक: रजिस्ट्री सेवाओं का विस्तार और जमीनी प्रभाव
छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग ने राज्य के चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों—भखारा (धमतरी), लवन (बलौदाबाजार-भाटापारा), सकरी और राजकिशोर नगर (बिलासपुर)—में नए उप पंजीयक कार्यालय खोलने की प्रशासकीय स्वीकृति दे दी है। यह कदम केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन किसानों और छोटे भू-स्वामियों पर पड़ेगा जिन्हें एक छोटी सी रजिस्ट्री के लिए पूरा दिन और सैकड़ों रुपये किराया खर्च कर जिला मुख्यालय जाना पड़ता था।
जमीनी हकीकत: जिला मुख्यालयों की भीड़ और बिचौलियों का अंत
वर्तमान में बिलासपुर के सकरी और राजकिशोर नगर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों के निवासियों को रजिस्ट्री के लिए पुराने कलेक्टोरेट परिसर स्थित पंजीयन कार्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है। वहां रोजाना 100 से अधिक रजिस्ट्री होने के कारण लोगों को टोकन लेने के लिए सुबह 8 बजे से लाइन लगानी पड़ती है।
सकरी के स्थानीय निवासी संतोष साहू कहते हैं: “सकरी अब खुद एक बड़ा शहर बन चुका है। हमें रजिस्ट्री के लिए शहर के भीतर ट्रैफिक जाम से जूझते हुए तहसील ऑफिस जाना पड़ता था, जिसमें पूरा दिन बर्बाद होता था। स्थानीय स्तर पर दफ्तर खुलने से अब हम सीधे पटवारी से मिलान कर वहीं काम करवा सकेंगे।”
धमतरी के भखारा और बलौदाबाजार के लवन क्षेत्र में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। लवन क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 25-30 किलोमीटर है। नया कार्यालय खुलने से बिचौलियों का दखल कम होगा, क्योंकि ग्रामीण अब अपने परिचित क्षेत्र में सीधे अधिकारियों से संवाद कर सकेंगे।
हाइपरलोकल प्रभाव विश्लेषण: कहां क्या बदलेगा?
इस निर्णय का प्रभाव छत्तीसगढ़ के इन विशिष्ट क्षेत्रों पर अलग-अलग तरह से पड़ेगा:
- बिलासपुर (सकरी व राजकिशोर नगर): ये दोनों क्षेत्र ‘रियल एस्टेट हॉटस्पॉट’ हैं। यहाँ नए दफ्तर खुलने से शहरी संपत्तियों के हस्तांतरण में तेजी आएगी। इससे नगर निगम की आय में भी वृद्धि होगी क्योंकि नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
- धमतरी (भखारा) व बलौदाबाजार (लवन): ये मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र हैं। यहाँ छोटे किसानों के बीच आपसी जमीन बंटवारे और “धान” बेचने के लिए जरूरी ऋण पुस्तिका अपडेट कराने हेतु रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब सुलभ होगी। लवन क्षेत्र के लगभग 40-50 गांवों के किसानों को अब बलौदाबाजार शहर जाने की जरूरत नहीं होगी।
ऐतिहासिक संदर्भ और पैटर्न: क्या इस बार बदलेगी सूरत?
पिछले 5 वर्षों में छत्तीसगढ़ में ‘ई-पंजीयन’ की दिशा में काफी काम हुआ है, लेकिन भौतिक बुनियादी ढांचे (Physical Infrastructure) की कमी हमेशा एक बाधा रही है। इससे पहले 2021-22 में भी कुछ उप-तहसीलों को उन्नत करने की घोषणा हुई थी, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण वहां रजिस्ट्री सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाई थी। इस बार वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 10 क्रांतिकारी सुधारों (जैसे ऑटो डीड जनरेशन) की बात कही है, जो यह संकेत देते हैं कि सरकार केवल दफ्तर नहीं खोल रही, बल्कि तकनीक को भी स्थानीय स्तर पर पहुंचा रही है।
सटीक आंकड़े और जानकारी
- छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कुल 98 से अधिक उप पंजीयक कार्यालय कार्यरत हैं, इन 4 के जुड़ने से यह संख्या बढ़कर 102 के पार पहुंच जाएगी।
- आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर जिले में हर साल औसतन 25,000+ संपत्तियों की रजिस्ट्री होती है, जिसका 30% बोझ अकेले सकरी और राजकिशोर नगर क्षेत्र का है।
अगले कदम और सुझाव: इन क्षेत्रों के निवासी ध्यान दें कि कार्यालयों के भौतिक रूप से शुरू होने में 2 से 3 महीने का समय लग सकता है। तब तक आप ‘IGRS Chhattisgarh’ पोर्टल पर जाकर अपनी जमीन का रिकॉर्ड चेक कर सकते हैं।
- हेल्पलाइन: पंजीयन संबंधी किसी भी शिकायत के लिए विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-233-2488 पर संपर्क करें।
- दस्तावेज: रजिस्ट्री के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और संबंधित खसरा-बी1 की कॉपी तैयार रखें।











