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दुर्ग में इडली-डोसा बेचने वाले निकले शातिर चोर, 8 इलाकों में दी दबिश, 7 लाख का माल बरामद

दिन में सादगी, रात में सेंधमारी: दुर्ग पुलिस ने किया अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

दुर्ग छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अपराध का एक ऐसा चेहरा सामने आया है जिसने पुलिस और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। शहर की सड़कों पर दिन भर इडली-डोसा का ठेला लगाकर आम नागरिक की तरह दिखने वाले युवक असल में एक शातिर चोर गिरोह के सदस्य निकले। दुर्ग पुलिस ने रविवार को इस गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने पिछले तीन महीनों में जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में आतंक मचा रखा था।

पुलिस ने इनके पास से चोरी के सोने-चांदी के जेवरात और नकदी समेत कुल 7 लाख 15 हजार रुपये की संपत्ति बरामद की है। यह कार्रवाई तकनीकी साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई, जब पुलिस को रायपुर के मठ पुरैना इलाके में इनके छिपे होने की सूचना मिली।


जमीनी हकीकत: क्यों नाकाम हो रही थी गश्त?

दुर्ग पुलिस की आधिकारिक विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि विशेष टीम की मुस्तैदी से यह गिरोह पकड़ा गया, लेकिन 36khabar.com की जमीनी पड़ताल कुछ और ही इशारा करती है। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच जब ये चोरियां हो रही थीं, तब पाटन और उतई जैसे क्षेत्रों के ग्रामीणों ने लगातार ‘नाइट पेट्रोलिंग’ बढ़ाने की मांग की थी।

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ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की गश्त मुख्य सड़कों तक सीमित रहती है, जबकि चोरों ने गलियों के भीतर स्थित उन मकानों को निशाना बनाया जो खेत या सुनसान रास्तों की ओर खुलते हैं। गिरफ्तार आरोपी मनीष अमोरिया पर पहले से 10 मामले दर्ज होने के बावजूद उसका बेखौफ होकर रायपुर-दुर्ग के बीच मूवमेंट करना पुलिस के इंटेलिजेंस नेटवर्क पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है।


हाइपरलोकल प्रभाव: इन 8 क्षेत्रों के रहवासी थे दहशत में

इस गिरोह की गिरफ्तारी से दुर्ग के ग्रामीण और शहरी दोनों ही बेल्ट के लोगों ने राहत की सांस ली है। इस गिरोह ने मुख्य रूप से इन क्षेत्रों को निशाना बनाया था:

  • पाटन और रानीतराई: ये कृषि प्रधान क्षेत्र हैं, जहां फसल कटाई के बाद किसानों के घरों में नकदी होने की संभावना ज्यादा रहती है।
  • उतई और अमलेश्वर: रायपुर से सटे इन इलाकों में नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं, जहां सुरक्षा गार्ड्स की कमी का फायदा इन चोरों ने उठाया।
  • नंदनी: यहां के औद्योगिक और श्रमिक बस्तियों में सूने मकानों को टारगेट किया गया।
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36khabar.com की रिपोर्ट के अनुसार, चोरों ने उन घरों को चुना जहां परिवार किसी शादी-ब्याह या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जिला मुख्यालय गए हुए थे।


ऐतिहासिक संदर्भ और पैटर्न रिकग्निशन

दुर्ग-भिलाई के जुड़वां शहरों में ‘रेहड़ी-पटरी’ की आड़ में अपराध करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। साल 2022 में भी भिलाई के सुपेला इलाके में कबाड़ बेचने वालों की आड़ में एक गिरोह ने ताला तोड़ने की कई वारदातों को अंजाम दिया था। पुलिस के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि अंतर्राज्यीय या अंतर-जिला अपराधी अक्सर ऐसे पेशों को चुनते हैं जिससे उन्हें दिन भर रेकी करने का वैध मौका मिल सके। इडली-डोसा का ठेला इन्हें हर घर के सामने रुकने और घर की स्थिति (ताला लगा है या नहीं) भांपने का आसान जरिया प्रदान करता था।


निष्कर्ष: नागरिकों के लिए ज़रूरी कदम

दुर्ग और रायपुर के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों को अब और अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है। यदि आपके घर के आसपास कोई नया फेरीवाला या ठेलेवाला संदिग्ध रूप से बार-बार चक्कर लगा रहा है, तो तुरंत स्थानीय थाने को सूचित करें।

  • किरायेदार/फेरीवाला सत्यापन: अपने क्षेत्र के बीट गार्ड से संपर्क कर नए आने वाले फेरीवालों के सत्यापन की मांग करें।
  • पड़ोसी धर्म: यदि आप कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं, तो पड़ोसियों को सूचित करें और घर की लाइट जलती न छोड़ें (जो चोरी का संकेत देती है)।
  • हेल्पलाइन: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दुर्ग पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 0788-2322071 पर दें।
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