प्रोजेक्ट दक्ष: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों का डिजिटल रूपांतरण
प्रोजेक्ट दक्ष: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों का डिजिटल रूपांतरण

प्रोजेक्ट दक्ष: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों का डिजिटल रूपांतरण

छत्तीसगढ़ के विकास की कहानी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किया गया प्रोजेक्ट दक्ष: हम होंगे स्मार्ट, राज्य के सरकारी कर्मचारियों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है। यह परियोजना सिर्फ़ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी पहल है जो छत्तीसगढ़ के प्रशासन को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का वादा करती है।

डिजिटल सशक्तिकरण की ओर एक कदम

आज के समय में, डिजिटल साक्षरता किसी भी व्यक्ति, खासकर सरकारी कर्मचारियों के लिए, बेहद ज़रूरी है। प्रोजेक्ट दक्ष इसी आवश्यकता को समझते हुए, जनपद पंचायत सचिवों और इंजीनियरों को व्यापक प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। यह प्रशिक्षण सिर्फ़ कंप्यूटर चलाना सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, डिजिटल दस्तावेज़ प्रबंधन, ईमेल और MS Office जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

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प्रशिक्षण की खासियतें

प्रशिक्षण में व्यावहारिक ज्ञान पर ज़ोर दिया जा रहा है। कर्मचारियों को कंप्यूटर और मोबाइल फ़ोन के उपयोग से लेकर अत्याधुनिक डिजिटल टूल्स तक की जानकारी दी जा रही है। सोचिए, एक सरकारी अधिकारी को अगर ईमेल का सही इस्तेमाल करना नहीं आता, तो वो कितनी महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रह सकता है! प्रोजेक्ट दक्ष इसी समस्या का समाधान कर रहा है।

एक उदाहरण के तौर पर, मैं अपने एक दोस्त की बात बताना चाहूँगा जो एक ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी अधिकारी है। उसे पहले कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस प्रशिक्षण के बाद वह बहुत ज़्यादा आत्मविश्वास से भरा हुआ है और अब वह डिजिटल तरीके से अपने काम को आसानी से निपटा पा रहा है।

पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि

प्रोजेक्ट दक्ष का लक्ष्य केवल कर्मचारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना नहीं है, बल्कि इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। जैसे-जैसे अधिकारी डिजिटल रूप से सशक्त होंगे, वैसे-वैसे सरकारी सेवाएँ और भी तेज और प्रभावी होंगी। यह छत्तीसगढ़ के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो दिखाता है कि कैसे तकनीक का उपयोग करके सरकारी तंत्र को और अधिक कुशल और जन-हितैषी बनाया जा सकता है।