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रायपुर-खरोरा मार्ग पर यात्री बस में लगी भीषण आग, बाल-बाल बचे 40 यात्री

रायपुर: खरोरा के पास धू-धू कर जली यात्री बस, सुरक्षित निकले यात्री

राजधानी रायपुर से लगे खरोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत भैंसा गांव के पास आज दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया। रायपुर से बलौदाबाजार की ओर जा रही एक निजी यात्री बस में अचानक भीषण आग लग गई। बस के इंजन से धुआं उठते ही चालक ने सूझबूझ दिखाई और वाहन को सड़क किनारे खड़ा किया, जिससे बस में सवार लगभग 40 यात्रियों ने आनन-फानन में उतरकर अपनी जान बचाई। देखते ही देखते पूरी बस आग के गोले में तब्दील हो गई और लाखों का सामान जलकर राख हो गया।

जमीनी हकीकत: मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति

खरोरा और तिल्दा क्षेत्र के स्थानीय निवासियों से बातचीत में एक कड़वी सच्चाई सामने आती है। भैंसा गांव के निवासी तिलक वर्मा ने बताया, “इस मार्ग पर चलने वाली अधिकांश बसें 10 से 15 साल पुरानी हैं। गर्मियों की शुरुआत होते ही इंजन ओवरहीट होने लगते हैं, लेकिन मालिक केवल रंग-रोगन करवाकर बसें सड़क पर उतार देते हैं।”

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ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हमने पाया कि इस रूट पर चलने वाली 70% बसों में ‘फायर एक्सटिंग्विशर’ (अग्निशमन यंत्र) या तो एक्सपायर्ड होते हैं या उन्हें चलाने वाला कोई नहीं होता। आज की घटना में भी बस में आग बुझाने का कोई प्राथमिक साधन काम नहीं आया, जिसके कारण आग ने विकराल रूप ले लिया।

जिला-वार प्रभाव और परिवहन संकट

यह हादसा केवल एक बस का जलना नहीं है, बल्कि रायपुर और बलौदाबाजार जिलों के बीच प्रतिदिन सफर करने वाले हजारों मजदूरों और छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चोट: इस मार्ग की बसों में ग्रामीण अपनी उपज (सब्जियां और अनाज) लेकर रायपुर मंडी आते हैं। आज की आग में कई किसानों का सामान जल गया, जिसकी भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है।
  • औद्योगिक बेल्ट की चुनौती: खरोरा और सिलतरा के बीच चलने वाली इन बसों में शिफ्ट ड्यूटी वाले श्रमिक सवार होते हैं। बसों की खराब स्थिति के कारण अक्सर श्रमिक समय पर काम पर नहीं पहुँच पाते।
  • पिछले हादसों का संदर्भ: पिछले साल भी धरसींवा और आरंग ब्लॉक में इसी तरह शॉर्ट सर्किट से बसों में आग लगने की 3 घटनाएं दर्ज की गई थीं। प्रशासन द्वारा जांच के आदेश तो दिए जाते हैं, लेकिन फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया पर आज भी सवालिया निशान है।
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तकनीकी कारण और नियमों की अनदेखी

छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, हर व्यावसायिक वाहन का त्रैमासिक फिटनेस टेस्ट अनिवार्य है। हालांकि, आरटीओ (RTO) आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले में पंजीकृत लगभग 15% निजी बसें तकनीकी रूप से “अनफिट” श्रेणी में होने के बावजूद सड़कों पर दौड़ रही हैं। बस में आग लगने का मुख्य कारण ‘इलेक्ट्रिक वायरिंग में अवैध अल्टरेशन’ (जैसे अतिरिक्त लाइटें या म्यूजिक सिस्टम लगाना) और इंजन की समय पर सर्विसिंग न होना पाया जाता है।

क्या करें यात्री? सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम

अगर आप भी छत्तीसगढ़ की निजी बसों में सफर करते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • बस में चढ़ते ही इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार) की जांच करें कि वह जाम तो नहीं है।
  • यदि बस के केबिन में जलने की गंध आए, तो तुरंत चालक को सूचित कर बस रुकवाएं।
  • शिकायत के लिए परिवहन विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1100 या स्थानीय आरटीओ कार्यालय में बस नंबर के साथ रिपोर्ट करें।
  • हादसे की स्थिति में डायल 112 को तुरंत सूचित करें।
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अगला कदम: क्या आप अपने क्षेत्र की बसों की फिटनेस से संतुष्ट हैं? अगर आपको किसी बस में खतरा महसूस होता है, तो हमें उसकी फोटो और रूट के साथ कमेंट में बताएं, हम प्रशासन तक आपकी आवाज पहुँचाएंगे।

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