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रायपुर: राज्य सेवा से IAS बने 8 अधिकारियों की मुख्यमंत्री से भेंट, जमीनी चुनौतियों पर चर्चा
रायपुर: राज्य सेवा से IAS बने 8 अधिकारियों की मुख्यमंत्री से भेंट, जमीनी चुनौतियों पर चर्चा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) और अन्य संबद्ध सेवाओं से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत हुए अधिकारियों से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पदोन्नति केवल व्यक्तिगत गौरव का विषय नहीं है, बल्कि प्रदेश की जनता की सेवा के लिए एक व्यापक अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर नवनियुक्त IAS अधिकारी श्री तीर्थराज अग्रवाल, सुश्री लीना कोसम, श्री बीरेन्द्र बहादुर पंचभाई, श्री सुमित अग्रवाल, श्री संदीप कुमार अग्रवाल, श्री आशीष कुमार टिकरिहा, श्री ऋषभ पाराशर और श्री तरुण किरण उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि ये अधिकारी पूरी सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे ताकि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।

जमीनी हकीकत: पदोन्नति के बाद की चुनौतियां

राज्य प्रशासनिक सेवा से IAS कैडर में आए इन अधिकारियों के पास छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में काम करने का 15 से 20 वर्षों का लंबा अनुभव है। ’36khabar’ की पड़ताल के अनुसार, इन अधिकारियों की सबसे बड़ी चुनौती राज्य के दूरस्थ अंचलों, विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग में प्रशासन और जनता के बीच के फासले को कम करना है।

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अक्सर देखा गया है कि सीधी भर्ती वाले (Direct Recruit) IAS अधिकारियों की तुलना में राज्य सेवा से आए अधिकारियों की पकड़ स्थानीय बोलियों और क्षेत्रीय समस्याओं पर अधिक मजबूत होती है। उदाहरण के तौर पर, सुकमा या बीजापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात होने पर इन अधिकारियों से यह अपेक्षा रहेगी कि वे केवल फाइलों तक सीमित न रहकर ‘नार नय्या’ (गाँव की सरकार) की अवधारणा को सच करें। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो उनकी गोंडी या हलबी बोली समझ सकें और स्थानीय स्तर पर लंबित राजस्व मामलों (सीमांकन, नामांतरण) का त्वरित निराकरण करें।

जिला-वार प्रभाव और प्रशासनिक अनुभव का लाभ

इन 8 अधिकारियों की नई नियुक्तियां प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक नया संतुलन लाएंगी।

  • औद्योगिक बेल्ट (कोरबा, रायगढ़): इन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के पुराने मामले लंबित हैं। राज्य सेवा के अनुभव वाले अधिकारी इन पेचीदगियों को बेहतर समझते हैं।
  • कृषि प्रधान जिले (बेमेतरा, बालोद): धान खरीदी और ‘महतारी वंदन योजना’ के क्रियान्वयन में इन अधिकारियों की फील्ड मॉनिटरिंग महत्वपूर्ण होगी।
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्र: बस्तर के अंदरूनी इलाकों में ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) जैसी योजनाओं को धरातल पर उतारने में इन अधिकारियों का पुराना फील्ड अनुभव मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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ऐतिहासिक संदर्भ और प्रशासनिक पैटर्न

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास को देखें तो राज्य सेवा से पदोन्नत अधिकारियों ने हमेशा से ‘ब्रिज’ (पुल) का काम किया है। पिछले 5 वर्षों का रिकॉर्ड बताता है कि जब-जब फील्ड अनुभवी अधिकारियों को कलेक्टरेट या महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी मिली है, तब-जब ‘मुख्यमंत्री जनदर्शन’ में आने वाली शिकायतों के ग्राफ में कमी देखी गई है। यह 2020 की उस स्थिति से अलग है जब नवाचारों के नाम पर जमीनी मुद्दों को नजरअंदाज किया गया था और बाद में प्रशासनिक फेरबदल करना पड़ा था।

मुख्यमंत्री साय का इन अधिकारियों को “अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने” का निर्देश इस बात का संकेत है कि सरकार अब केवल डेटा पर नहीं, बल्कि ‘डिलीवरी’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

अगले कदम और महत्वपूर्ण जानकारी

नवनियुक्त अधिकारियों को जल्द ही विभिन्न विभागों या जिलों में नई पदस्थापना दी जाएगी। आम नागरिक और संबंधित विभागों के कर्मचारी निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें:

  • राजस्व या स्थानीय विवादों से जुड़ी फाइलों के लिए आगामी स्थानांतरण सूची का इंतजार करें।
  • किसी भी विभागीय कार्य में देरी होने पर आप मुख्यमंत्री पोर्टल या ‘छत्तीसगढ़ समाधान’ हेल्पलाइन 1800-233-4352 पर अपनी बात रख सकते हैं।
  • इन अधिकारियों की प्रोफाइल और उनकी कार्यशैली के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट के ‘प्रशासन’ सेक्शन को फॉलो करें।
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