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रायपुर: कमिश्नर प्रणाली में 'विजिबल पुलिसिंग' पर जोर, डॉ. संजीव शुक्ला ने दी थानों को सख्त हिदायत
रायपुर: कमिश्नर प्रणाली में 'विजिबल पुलिसिंग' पर जोर, डॉ. संजीव शुक्ला ने दी थानों को सख्त हिदायत

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद अब कागजी बदलावों को जमीन पर उतारने की कवायद शुरू हो गई है। रायपुर के प्रथम पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने शंकर नगर स्थित सभागार में आरक्षक से लेकर राजपत्रित अधिकारियों तक की ‘पाठशाला’ ली। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु केवल नई शक्तियों का प्रयोग नहीं, बल्कि रायपुर की जनता के बीच पुलिस की गिरती साख को दोबारा बहाल करना और विजिबल पुलिसिंग को प्रभावी बनाना रहा।

कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि अब थाना स्तर पर जवाबदेही तय होगी। यदि राजधानी के चौक-चौराहों पर आम नागरिक असुरक्षित महसूस करता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित बीट प्रभारी और थाना प्रभारी की होगी।

जमीनी हकीकत: थानों की कार्यप्रणाली और जनता का अनुभव

रायपुर के थानों की जमीनी हकीकत अक्सर सरकारी दावों से अलग रही है। पुरानी बस्ती, खमतराई और भनपुरी जैसे घने इलाकों में रहने वाले नागरिकों की आम शिकायत रही है कि रिपोर्ट लिखाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और व्यवहार अक्सर सहयोगात्मक नहीं होता।

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रायपुर के आमापारा के निवासी किशोर साहू कहते हैं, “साहब, सिस्टम कोई भी आए, जब तक सिपाही और मुंशी का व्यवहार नहीं बदलेगा, हम थाने जाने से डरेंगे।” इसी बात को भांपते हुए डॉ. शुक्ला ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस को ‘शासक’ नहीं बल्कि ‘सेवक’ की भूमिका में आना होगा। कमिश्नरी प्रणाली में अब पुलिस के पास मजिस्ट्रियल पावर हैं, लेकिन इसका उपयोग अपराधियों के खिलाफ ‘नकेल’ कसने के लिए होगा, न कि आम जनता पर रौब झाड़ने के लिए।

जिला-वार और जोन-वार प्रभाव: रायपुर की नई घेराबंदी

कमिश्नरी प्रणाली के तहत रायपुर को नॉर्थ, वेस्ट और सेंट्रल जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन की अपनी चुनौतियां हैं:

  • वेस्ट जोन (आजाद चौक, सरस्वती नगर): यहां नशे के बढ़ते कारोबार और चाकूबाजी की घटनाओं पर रोक लगाना सबसे बड़ी चुनौती है।
  • नॉर्थ जोन (खमतराई, उरला): यह औद्योगिक बेल्ट है, जहां बाहरी मजदूरों की आवाजाही और चोरी की घटनाएं अधिक होती हैं। यहां ‘बीट पुलिसिंग’ को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • सेंट्रल जोन (कोतवाली, गंज): व्यावसायिक क्षेत्र होने के कारण यहां ट्रैफिक मैनेजमेंट और साइबर फ्रॉड के मामलों पर फोकस रहेगा।
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डॉ. शुक्ला ने साफ किया कि अब एडिशनल डीसीपी (ADCP) और डीसीपी (DCP) स्तर के अधिकारी केवल ऑफिस में नहीं बैठेंगे, बल्कि उन्हें फील्ड पर उतरकर गश्त की मॉनिटरिंग करनी होगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और पुलिसिंग का नया स्वरूप

छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार है जब रायपुर को पूर्णतः कमिश्नरी का दर्जा मिला है। इससे पहले तक पुलिस को प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों (जैसे धारा 107/116) के लिए जिला प्रशासन (Collector/SDM) पर निर्भर रहना पड़ता था। इस देरी का फायदा अपराधी उठाते थे।

साल 2022-23 के आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर में छोटे विवादों के बाद होने वाली हत्याओं और गंभीर अपराधों में 15% की वृद्धि देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण त्वरित पुलिस कार्रवाई का अभाव था। अब कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस के पास खुद के अदालती अधिकार होंगे, जिससे आदतन अपराधियों को जिला बदर करने या जेल भेजने की प्रक्रिया तेज होगी।

नागरिकों के लिए अगले कदम

रायपुर पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ नए मानक तय किए हैं:

  • शिकायत दर्ज करना: यदि थाने में आपकी सुनवाई नहीं होती है, तो आप सीधे संबंधित जोन के DCP (पुलिस उपायुक्त) कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं।
  • व्यवहार की शिकायत: यदि कोई पुलिसकर्मी अभद्रता करता है, तो रायपुर पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल या कंट्रोल रूम नंबर पर सूचना दें।
  • विजिबल पुलिसिंग: शाम 6 से रात 10 बजे के बीच अपने इलाके के प्रमुख चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी चेक करें; यदि पुलिस नदारद है, तो फीडबैक दें।
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हेल्पलाइन: रायपुर पुलिस कंट्रोल रूम: 0771-2424800 / 94791-91099 डायल 112 (आपातकालीन स्थिति के लिए)

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