किताबों से बाहर निकला विज्ञान: जशपुर के मॉडल से नवा रायपुर के केंद्र तक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर के राखी में प्रदेश के पहले ‘अंतरिक्ष केंद्र’ का शुभारंभ किया। जमीनी हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों, खासकर जशपुर और सरगुजा के सरकारी स्कूलों के बच्चे पिछले कुछ वर्षों से कबाड़ से रॉकेट मॉडल बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने इसी ‘देसी प्रतिभा’ को पहचानते हुए घोषणा की है कि अब प्रदेश के सभी जिलों में ‘अंतरिक्ष संगवारी’ केंद्र खोले जाएंगे। यह उन बच्चों के लिए क्रांतिकारी कदम है जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन संसाधनों के अभाव में वे इसरो (ISRO) या नासा (NASA) जैसे संस्थानों तक नहीं पहुँच पाते थे।

गगनवीर का अनुभव: जब रॉकेट इग्नाइट होता है, तो सब भूल जाते हैं
अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की मौजूदगी ने कार्यक्रम में जान फूंक दी। उन्होंने बच्चों के साथ जो अनुभव साझा किया, वह किसी भी पाठ्यपुस्तक से ज्यादा कीमती था।
- सीधा संवाद: शुभांशु ने बताया कि 20 दिनों में उन्होंने पृथ्वी की 320 बार परिक्रमा की।
- बौद्धिक तीक्ष्णता: उन्होंने याद दिलाया कि कैसे छत्तीसगढ़ के एक बच्चे ने उनसे प्रधानमंत्री के ‘होमवर्क’ के बारे में पूछा था। यह दर्शाता है कि हमारे प्रदेश के बच्चों की सोच केवल किताबी नहीं, बल्कि विश्लेषणात्मक भी है।
हाइपरलोकल इम्पैक्ट: किसानों और युवाओं के लिए कैसे फायदेमंद?
यह केंद्र केवल टेलिस्कोप देखने की जगह नहीं है, इसके प्रभाव दूरगामी होंगे:
- सटीक मौसम पूर्वानुमान: कृषि प्रधान जिलों (जैसे बेमेतरा, धमतरी) के किसानों को क्लाउड मैपिंग के जरिए बुवाई और कटाई का सही समय पता चल सकेगा।
- रोजगार के नए अवसर: सैटेलाइट ट्रैकिंग और डेटा एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उन्हें बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
- रक्षा और सुरक्षा: बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सैटेलाइट तकनीक का उपयोग ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सुरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की राह
41 साल बाद भारत ने अंतरिक्ष में फिर से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और छत्तीसगढ़ इस गौरवमयी यात्रा का हिस्सा बनने वाला पहला राज्य बनकर उभरा है। 2025 में हुए ऑनलाइन संवाद के बाद महज कुछ महीनों में इस केंद्र का धरातल पर उतरना प्रशासनिक तत्परता को दर्शाता है।
विशेष टिप: जशपुर के जिन बच्चों ने रॉकेट बनाया था, उन्हें इस केंद्र में विशेष मेंटरशिप दी जाएगी। यह केंद्र अब छत्तीसगढ़ के “वैज्ञानिक भविष्य की प्रयोगशाला” के रूप में जाना जाएगा।
युवाओं और छात्रों के लिए अगले कदम
- विजिट: स्कूल और कॉलेज के छात्र नवा रायपुर स्थित इस केंद्र का भ्रमण करने के लिए जिला प्रशासन के ‘प्रोजेक्ट अंतरिक्ष’ पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
- पंजीकरण: जल्द ही हर जिले में खुलने वाले केंद्रों के लिए ‘स्पेस वॉलंटियर्स’ (अंतरिक्ष संगवारी) के रूप में पंजीकरण शुरू होगा।











