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"छत्तीसगढ़ के हरेली उत्सव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की शिरकत, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने गाया लोकगीत"
"छत्तीसगढ़ के हरेली उत्सव में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की शिरकत, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने गाया लोकगीत"

छत्तीसगढ़ की धरती पर हरेली त्योहार की धूम मची हुई है। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के निवास पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने शिरकत की। इस उत्सव ने न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित किया, बल्कि राजनीतिक एकता का भी संदेश दिया।

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ उपमुख्यमंत्री अरुण साव और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी मौजूद रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, सहयोगी और समर्थक भी एकत्र हुए, जो इस बात का प्रमाण था कि हरेली त्योहार किस प्रकार लोगों को एकजुट करने की क्षमता रखता है।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पल तब आया जब मंत्री टंक राम वर्मा ने मंच संभाला और एक मनमोहक छत्तीसगढ़ी गीत गाया। उनके इस प्रदर्शन ने न केवल उपस्थित लोगों का दिल जीता, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के प्रति उनके प्रेम को भी दर्शाता था। यह क्षण वास्तव में छत्तीसगढ़ी परंपरा और आधुनिक राजनीति के बीच एक सुंदर सामंजस्य का प्रतीक बन गया।

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इस अवसर पर कई अन्य प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित थे, जिनमें रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, और रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू शामिल थे। इन सभी नेताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक राजनीतिक महत्व प्रदान किया, जबकि साथ ही यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति के प्रति उनके सम्मान को भी दर्शाता था।

हरेली त्योहार, जो छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, इस वर्ष राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी उत्साह का केंद्र बन गया। यह त्योहार न केवल फसलों की बुवाई के शुभारंभ का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी एक अवसर है। इस प्रकार के आयोजन से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के नेता अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने के महत्व को समझते हैं।

समारोह में उपस्थित जनसमूह ने न केवल नेताओं के साथ हरेली की खुशियाँ मनाईं, बल्कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत का भी जश्न मनाया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आधुनिक राजनीति के बीच एक सुंदर संगम बन गया, जो निश्चित रूप से राज्य के लोगों के दिलों में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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