WhatsApp Group

नक्सलियों ने जन अदालत में लिया फैसला, अगवा इंजीनियर को सात दिनों बाद छोड़ा
नक्सलियों ने जन अदालत में लिया फैसला, अगवा इंजीनियर को सात दिनों बाद छोड़ा

रायपुर। आखिरकार नक्सलियों का दिल पसीज गया और अगवा किए इंजीनियर को सात दिनों बाद छोड़ दिया गया। अगवा किए जाने के बाद से इंजीनियर की पत्नी अर्पिता लकड़ा जंगलों में अपने बच्चे को लेकर भटक रही थी। वे अपने पति को अच्छा इंसान बताते हुए नक्सलियों से दया की अपील की थी। इधर इंजीनियर के रिहा होने के बाद प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। बता दें कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में अगवा किए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के सब इंजीनियर रोशन लकड़ा को जन अदालत लगाने के बाद नक्सलियों ने बुधवार को रिहा कर दिया। सब इंजीनियर को वे सप्ताहभर अपने पास रखा था।

अपहरण के बाद से इंजीनियर की पत्नी ने नक्सलियों से अपने पति की रिहाई की गुहार लगाते जंगल में भटक रही थी। एक सप्ताह तक नक्सलियों ने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इंजीनियर रोशन लकड़ा को अगवा किए जाने की सूचना के बाद से उसकी पत्नी अर्पिता लकड़ा हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने एक उम्मीद के साथ जंगलों में अपने बच्चे को लेकर भटक रही थी। उन्होंने वीडियो जारी कर अपने पति को अच्छा इंसान बताते हुए छोड़ने का आग्रह नक्सलियों से किया था। बताते हैं कि अर्पिता अपने पति को खोजते हुए वहां तक पहुंच गई थी, जहां नक्सलियों ने रोशन को रखा था। मामले में बीजापुर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में कार्यरत सब इंजीनियर रोशन लकड़ा और चपरासी लक्ष्मण परतगिरी 11 नवंबर को सड़क निर्माण का काम देखने के लिए मनकेली-गोरला गांव की तरफ गए थे।

इसे भी पढ़ें  मछली पालन से नारद का परिवार खुशहाली की राह पर

24 घंटे से ज्यादा समय बाद भी उनके नहीं लौटने पर नक्सलियों द्वारा अपहरण की आशंका जताई गई। 13 नवंबर को नक्सलियों ने चपरासी को जन अदालत लगाकर छोड़ दिया, जबकि सब इंजीनियर को अपने कब्जे में रखा था। पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता बलराम ठाकुर ने मीडिया को जानकारी दी तब यह मामला सामने आया था। सब इंजीनियर की इस रिहाई में मीडिया और स्थानीय लोगों की पहल की बात भी सामने आई है। बताया जाता है कि बीजापुर के जिस क्षेत्र में निर्माण कार्य को देखने दोनों कर्मचारी गए हैं वह अति संवेदनशील और नक्सलियों का प्रभाव वाला इलाका है। नक्सली सड़क निर्माण का शुरू से विरोध कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने इंजीनियर को अपहरण किया था। वहीं जिस क्षेत्र में नक्सलियों ने जन अदालत लगाई थी वह बेहद दुर्गम और संवेदनशील इलाका बताया जाता है।

इसे भी पढ़ें  छत्तीसगढ़: सीतानगरम गांव में जल जीवन मिशन ने बदली ज़िंदगी!

Leave a comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *