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धमतरी रेलवे स्टेशन का कायाकल्प: विकास के लिए अतिक्रमण हटाने की पहल
धमतरी रेलवे स्टेशन का कायाकल्प: विकास के लिए अतिक्रमण हटाने की पहल

धमतरी रेलवे स्टेशन पर आज सुबह से एक नया अध्याय शुरू हुआ है। स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई आरंभ हो गई है। यह कदम मध्य भारत की सबसे पुरानी छोटी रेल लाइन को बड़ी रेल लाइन में परिवर्तित करने की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है।

रेलवे बोर्ड के पुलिस अधिकारी और जवान दल-बल के साथ धमतरी पहुंचे हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर यह कार्रवाई शुरू की है। लगातार चेतावनियों और अल्टीमेटम के बाद यह कदम उठाया गया है। अब स्टेशन परिसर में तोड़फोड़ की कार्रवाई चल रही है, जिसमें पटरी के दोनों तरफ से लगभग 15-17 मकानों को हटाया जाएगा।

इस विशाल परियोजना के लिए लगभग 550 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। यह धनराशि न केवल रेल लाइन के विस्तार के लिए है, बल्कि स्टेशन परिसर के समग्र विकास के लिए भी है। परियोजना के तहत, पहली मंजिल की ढलाई के बाद परिसर में एक नई दीवार का निर्माण भी किया जा रहा है।

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धमतरी से केंद्री तक लगभग 67.20 किलोमीटर की इस परियोजना को दिसंबर 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में कुछ चुनौतियां भी हैं। स्थानीय प्रशासन से अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण परियोजना की प्रगति में बाधाएं आ रही हैं।

रेलवे प्रशासन ने इस मुद्दे को हल करने के लिए अब तक तीन बार जिला प्रशासन को पत्र लिखा है। वे चाहते हैं कि स्टेशन परिसर में काम में तेजी लाई जाए और रेलवे प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द स्थानांतरित किया जाए।

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 70 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला गुड्स टर्मिनल भी है। यह टर्मिनल क्षेत्र के व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह परियोजना न केवल धमतरी के लिए, बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। बड़ी रेल लाइन के आने से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, यात्रा का समय कम होगा, और क्षेत्र का आर्थिक विकास तेज होगा।

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हालांकि, इस विकास के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। स्थानीय निवासियों का विस्थापन एक बड़ी समस्या है, जिसके लिए उचित पुनर्वास योजना की आवश्यकता है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन को मिलकर इस मुद्दे का समाधान खोजना होगा, ताकि विकास के साथ-साथ लोगों के हितों की भी रक्षा हो सके।

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